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हर पल स्वयं में आनंदित रहना ही जीवन का सच्चा सुख है : बिमल सर्राफ

ई-दैनिक जागरण
२०८३ श्रावण ६, बुधबार १६:०७

रक्सौल, पूर्वी चंपारण ०६ साउन । जीवनका वास्तविक आनंद स्वयं में प्रसन्न और संतुष्ट रहने में है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में जब कोई साथ नहीं दिखाई देता, तब ईश्वर का साथ महसूस होता है।

उक्त विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322 ई के जोनल चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् रक्सौलके सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी चुनौतियां आएं, हर व्यक्ति के पास कुछ न कुछ ऐसा अवश्य होता है, जिसे वह कर सकता है और उसमें सफलता प्राप्त कर सकता है। दूसरों की भलाई करना अच्छी बात है, लेकिन इतना भावुक नहीं होना चाहिए कि हमारी अच्छाई ही हमारे लिए दुख का कारण बन जाए।

सर्राफ ने कहा कि समय, स्वास्थ्य और संबंध जीवन की सबसे अनमोल पूंजी हैं। इन्हें संभालकर रखना चाहिए, क्योंकि यही हमारी सच्ची संपत्ति है। उन्होंने लोगों से रिश्तों में प्रेम और विश्वास बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि गलती को क्षमा किया जा सकता है, लेकिन टूटा हुआ विश्वास दोबारा बनाना बहुत कठिन होता है।उन्होंने कहा कि जीवन जीने का सबसे अच्छा तरीका वही है, जिससे स्वयं को संतोष मिले और किसी अन्य व्यक्ति को कष्ट न पहुंचे। हमेशा खुश रहें, स्वस्थ रहें और सकारात्मक सोच के साथ जीवन के हर पल का आनंद लें।

अंत में उन्होंने कहा कि स्वयंको समझना और स्वयं में आनंदित रहना ही जीवनकी असली मौज है। हर क्षण को खुशी और संतुलन के साथ जीना ही सफल और सार्थक जीवन की पहचान है।

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